चुग्ली

डा. चन्देश्वर यादव

एकटा बडका गामके बगलमे एकटा बडका टोक रहे । ओइ टोकमे रङबिरङके चिरयचुनमुन जेना मैना, कठखोदी, कौवा आ कुछ किसिमके जंगली जनावरसब जेना खिखिर, सनगोइ, सेहो रहैत रहे । जयमेस एकटा बडका सिसोके गाछिप एगो सुगा आ सुगनी बहुते दिनस सेहो रहैत रहे । ऊ सिसोके गाछि बड झमटगर आ बडका रहे ।

बहुते सुगा आ सुगनी ओइ टोकमे रहे । मुदा सिसोपके सुगा आ सुगनी टोकमे नमुना रहे । दोसर सुगा आ सुगनी, आ चिरय चुनमुनके बिचमे कतियो बेर झगडा, लडाइ आ मनमुटाब भेल रहे । मुदा यइ सुगा सुगनी के बिच मे कहियो नै भेल रहे । जहियास देखी दुनु के बिचमे एकैटा बात रहे, ऊ माया आ प्रेम ।

दुनुके बिचमे येहन माया जेहन शेक्सपियरके रोमियो आ जुलियट । एक दुसराके लेल जानतक दिय बाला । ओतने नै सुगनी कहियो सुगा स अगाडि नै खाइ । पहिले अपना घरबालाके खियाबे तब खाइ । कहियोकाल सुगाके काम पस आबमे अबेर भयजाइ त सुगनी पैरा ताके आ सुगा आवे तब खियाक अपने खाइ ।

येमहर सुगा सेहो सुगनीके बड खियाल राखे । सुगा जखनीतखनी सुगनीके खुशी के लेल काम करे । हरेक पबनि मे सुगनीला लया लया लता कपडा सब किन दिए । कोनो मेला लागेत सुगनी के जरुर घुमाब लजाइ । यी सब देखक ओइ टोकमे बहुते चिरयचुनमुनसबके बिचमे माया सेहो बैढ गेल ।

मुदा सुगा सुगनी के परोसिया कौवा जे बगलके गाछिप खोता बनाक रहैत रहे । वकरा सुगा सुगनी बिच के माया देखल नै गेल । आ मने मने कौवा सोचैय आ कहैय, "थम तु दुनु यइ टोकके नमुना बनल छे, हम तोरा बिचमे जहर धदेवौ।"

बिहान भेले सुगा सबेरे सबेरे कामप चैल जाइय । त येमहर कौवा येहे मौका ताइक सुगनीके घरे अवैय आ कहैय, "हे परोसनि, कते कामे कामे करै छा, कहियो घुमहु नै अबैछा से हमहि आइ चइल अइलियो।"

"हे परोसनि, कथि कहियो भोरे भोरे हमरा त जलखैय, कलौव आ बेरहटिया सब बनव परै है, से हमरा समय नै बचैय, से केना अइयो।", कहैय सुगनी।

"कथि हमरो कहा समय भेटैत रहैय, मुदा समय मिलाक हम अइलियो।", कौवा कहैय।

"भने अइला ह, सुनाव समचार सब?" सुगनी कहैय।

"काइल कठखोदी आ कठखोदनि के बिचमे भइरदिन झगडा भेलै।", कौवा कहैय।

"एगो बात कहितो हमरा लाज लगैय।", कौवा कहैय।

"लाज के कोन बात है, कहन।", सुगनी कहैय।

"जे काइल हम पुरना टोकमे गेल रहि त तोरा सुगा के देखने हरियो। तोरा सुगा के देखने रहियो एगो दोसर सुगनी जरे घुमैत आ हसि मजाक करैत देखलियो।", कौवा कहैय।

यी बात सुइनक सुगनीके तरवक लहर माथा चढजाइय। आ मने मने सोचैय कि आव दहो मरदावाके हम जाइ देखबैछिय।

साझ पइरते आइ सुगा घर आइल आ कहलक, "यइ कत छि, पाइन लाउ बड पियास लागल हब।"

यी बात सुइनक सुगनी लोटा बजारलगैय आ राइतमे खाना बनाब के बद्ला जाक सुइतरहय।

यी सब देखक सुगा सुगनी के लगमे जाक कहैय, "कि भेल? कथिला सुइत रहली? भुखो लागल है।"

"ढकोसला! ओइ टोकमे जाक कहियो न।" सुगनी कहैय।

"अगर अहाँ हमरा स माया साँचो करैछि त एगो सर्त पूरा करु नै त फिसियो। बिहान हम परोसनि के बोलाक लबैछि।", सुगनी कहैय।

बिहान भेले परोसनि कौवा अबैय आ दुनुके बिचमे एकटा सर्त राइखदैय कि बिहान भोरे जे पहिले पुरना टोकके कदम गाछिप पुगत, वोकर माया असली, जे अबेरस पुगत, वोकर माया फिसियोके।

यी बात सुइनक दुनु परानि मने मने सोचैय कि हम पहिले पुगब त हम पहिले पुगब। मुदा सुगा तखने कदम गाछिप जाक बैठ गेल त सुगनी भोररियाके पैरा तकैय।

अग्हन पुसके महिना। ओइप सात दिनस सितलहर। पाँच दिन स पछिया हावा सिसैक रहल। दिनोमे हात हात नै देखाइबाला धोनी। बुढवा त बुढवा, जुवानो साझे घर धलैय।

एहनो जारके कोनो फिकिर नै करैत सुगा कदम गाछिप बैठक राइत बिताबके आ अपन प्रेम देखाबके सोइच लेने हब। जौ जौ राइत बितरहल हब, पछिया हावा आ धोनी ओतने बइढ रहल हब। राइत के दुपहरिया भगेल मुदा दिमागमे एकेटा बात कि हम आइ देखाय देब कि हमर माया असली हब।

एमहर घरमे गरमाइत बैठल सुगनी भिनसरवा के पैरा तकैय। बडका भोरे कदम गाछिप पुगल आ एमहर ओमहर तकैय। मुदा कतौ नै देखैय सुगाके। अतनेमे धिरे धिरे फरिच सेहो भ गेल त सुगनी के नजर गाछिके निचा परैय आ देखैय सुगाके भुइयाँप सुतल।

यी देखक सुगनी निचा अबैय आ देखैय सुगाके भुइयाँप मरलपरल। आ कातमे देखैय किछ लिखल। सुगा मैरते मैरते लिख गेल हब —

"हे हमर पिरिए सुगनी, हमत आइ तोरे प्यारमे परान तेजैछियो मुदा भगवान स बिन्ति करैछि कि हमर सात जनम तकके जिवनसाथी तोरे बनाबे!"

यी बात जब सुगनी पढैय त दुनु आइख लोरस डबडबा जाइय।

— समाप्त —
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