सुकुम्वासी

डा चन्देश्वर यादव

" हे हमर फुदि राजा ! अपना त एगो निमन खोताँ बनव परत ।", फुदनी कहैय ।

" खोताँके कोन जरुरी है?, कतेसानके जय गाछिप रहके मन करैय आ जय जंगल मे रहके मन करैय रहैजाइछि।", फुदी कहलक फुदनीस।

" अहाँ जाइनियोक अनठबैयत रहैछि।", फुदनी कहैय।

" नै त?", फुदी कहैय।

" फेरस अहाँ झुठ बजैय छि, अहाँ नैय जनैछिय कि हम देहस भारी छि आ होवके मास आइव रहलछै।", फुदनी कहैय।

" तेहन बात है! अहाँ त झाइपतोइपक बजैय रहैछि,त हम केना बुझ्बै। ", फुदी कहैय।

" त आव भेलैन खोइल बजनाइ।", फुदनी कहैय।

" हँ, आव बुझलिय कि। हमत अहाँला अकास स तरेगन तोइरक लादेव आ यी कोन बडका बात है।", फुदी कहैय।

" मजाक नै करुन, खोताँ बनव के समय आइव गेल है।", फुदनी कहैय।

" कोनो जंगल मे आ कोनो गाछिप बनालेबै।" फुदि कहलक फुदनीस।

" ठिके है! त कहियास ? कत बनाइब?", फुदनी कहैय।

" त येना करुन! हमरा जलखैय खियाय दिय, हम आइए जाइछि, आ कोनो निमन जंगल के निमन गाछिप बनाबके सुरु कदैछिय।", फुदी कहैय फुदनीस।

" रौतका रोटि छिते हय से खानलिय।", फुदनी कहैय।

" लाइब तबन?", फुदि कहलक फुदनीस।

त फुदनी रोटी आ नुनमिरचायके चटनी आइनक फुदीके दैयय। फुदी बड प्रेम स रोटि आ चटनी खाक , जंगल आ गाछिके तलासमे निकलैय आ फुदनी स कहैय।

" हम जाइ छि, निमन स रहब।"

" होतै, जलदिए चइल आइब।", फुदनी कहैय।

फुदी उरैत उरैत बिच दुपहरियामे एकटा बडका जंगल मे पुगैय। आ वरके गाछिप एक रति आराम कक जंगलके राजा सिंह स अनुरोध कैरते कहैय।

" हे महराज! हमरा दर्शन दिय।"

जंगलके महराज फुदीके अनुरोध सुइनक अबैय आ फुदीस कहैय।

" हे फुदी! हमरा तु कथिला बोलैला ह? कथि भेलोय कह?"

" हे महाराज! हमरा त कुछो नै भेलय मुदा हम सुकुम्वासी छि। हमरा अखनतक कोनो घरदुवार आ निजी जमिन आ गाछि नै है जैयप हम खोता बनाक रहि। लेकिन अखन हमरा खोताके जरुरी भगेल कइलाकि हमर फुदनी के जन्मासुद होइबला है । तैदुवारे हम अपनेके अनुरोध करैछि कि हमरा कोनो एगो गाछि उपलब्ध कराय दिय , तैयप हम खोता बनाक रहि।", फुदी कहलक राजास।

" हे फुदी! बात त बहुत सुन्दर करैछा। मुदा पहिल बात तु हमर राजके जनता नै छा, दोसर बात हमरा राजमे कोनो जग्गा जमीन आ गाछि खालि नै हय।", राजा कहैय।

" महराज! जनता लक राजा होइछै, हम कतौके छि , मुदा हम अपनेके शरनमे आइल छि, हमरा शरन दिय।", फुदी कहलक राजास।

" हम कइह देलियोसे कइह देलियोसे, हमरा पास कोनो उपाय नै छो, तु कतयौ दोसर जगह उपाय खोज।", राजा कहैय।

फुदी निराश होइत साँझमे फुदनीस भेटैय। फुदनी झटस पाइन आइनक फुदीके दइय आ समाचार सब पुछैय।

" कहु समाचार सब , केना कत भेटल?", फुदनी कहैय।

" कोनो जोगार नै लागल।", फुदी कहलक फुदनीस।

" अहाँके ओइ बिरान राजमे जाहिक नै चाही, अपने राजमे राजा साहेब ल जइतौ, समस्याके समाधान राजा साहेब क दिय। यी संसार बड बिचित्र है, जकराप बड आस करबै ओहे पहिने निरास क देत। तैदुवारे आस करनाइए बड बडका कमजोरी है। दोसरके बात सुनु, मुदा आस अपने जान प करु।", फुदनी कहैय फुदीस।

" अहाँ अपने राजाल जाऊ, सुनैय छिय जे अपने राजमे बहुते किसिमके आयोगसब जेना सुकुम्वासी आयोग, मधेसी आयोग, महिला आयोग, दलित आयोग आरो आरो, गठन भेल है आ सबके समस्या समाधान कदैहै।", फुदनी कहैय फुदीस।

यी बात सुइनक फुदी बेरहटिया सेहो नै खाइय आ उरैत उरैत राजाल पुगैय आ राजा के बिन्ति करैत सब समस्या सुनबैत कहैय।

" राजा साहेब! हम सुकुम्वासी छि आ हमरा जग्गा जमीन आ गाछि नै है जैयप हम खोता बनाक रहि। आ हमरा कनिया के जनमासुद होबेबला है। येहनमे हमरा खोताके बहुत जरुरी है से हमरा कोनो जग्गा आ गाछि उपलब्ध करादिय।"

" तु अते दिनस कत रहलेय? तु सुकुम्वासी आयोग मे नाम लिखैने छे?", राजा कहैय।

" जी नै। हम अनपढ लोक। हमरासबके मालुममे नै भेलैय मालिक। आब लिखा लेबैत नै होतै मालिक।", फुदी कहलक राजास।

" तोरासन गैरजिम्मेबार लोकमे आयोग लागल रहतै त लागले रैय जतै। आब कोनो उपाय नै हौ तोरा।" राजा कहैय।

राजा के पुलिस फुदीके गर्दनप हाथ धक बाहर निकाइल दैयय। त फुदी डबडबाइते आइख लक फुदनील यबैय।

फुदनी फुदीके डबडबाइत आइख देखक कहैय, " हे हमर फुदी राजा! तोरा कि भेलोय... यी समाज बड जालिम है। अगर तोरास कोनो प्रकारके फाइदा होवेबाला रहतो त तोरा यी समाज सैलुट मारतो, मुदा चिन्ता नै कर। चल कोनो परती, अलानीयेमे खोता बनाक रहब। चल अपने जानप आस राइखक मेहनत करब आ अपन निजी जमिने किनब।"

दुनु परानि फुदी आ फुदनी अलानी गाछीके तलासमे निकलैय। खोजैते खोजैते एकटा बडका धारल पुगैय। जयय धारके कातमे एकटा बडका पुरान गाछि देखैय। ओइ गाछिप अपन खोता बनाक अन्डा बच्चा पाल लगैय।

अखार साउनके महिना। तै पस सात दिनके सतैहा। उपरस पुरवा हावा हाँइ हाँइ। खेत खेतमे किसानसब हर बैल लक कादो करैत। रोपनीयासब छुप छुप धान रोपैत। मुदा पाइन परनाइ बन्द होवके नाम नै। धिरे धिरे वाइर आबके धारमे सुरु भजाइय।

यी सब देखक फुदी आ फुदनी अपना बच्चाके केना बचाइब तैला बहुत चिन्तित होइते फुदी फुदनीस कहैय।

" बच्चा के केना बचाइब?"

" कि करबै , भगवान आव जे करे। अपनासन गरिव असहाय के भगवाने देखत। यी समाज किछ नै करत।"

अतनेमे बडका वाइर अबैय आ जेना तेना फुदी फुदनी बच्चाके दोसर गाछीप धक बचबैय मुदा गाछि सहित फुदी फुदनीके दहाक लजाइय।

— समाप्त —