ईर्ष्या

डा. चन्देश्वर यादव

एक देश मे एकटा राजा रहे । ऊ राजा अपन राज काज बहुत इमान्दारिता आ सब जनता के बहुत खुसी स चलबैत रहे । राजा के दुगो बेटा रहे । जेठका के नाम भिमदत्त रहे त छोटका के सुनिलदत्त रहे । जेठका के सादी विवाह भक मेहुरारु सोहो बस लागल रहे त छोटका अखन गुरुकुल मे पढाइ पूरा करैइते रहे ।

छोटका सुनिलदत देखमे जेहने सुभक रहे, ऊ वतने मन के सुसिल आ सुन्दर सेहो रहे । मुदा देवर के सुसिल स्वभाव आ सुभक मुखरा भौजी रुपवत्ति के कहियो मन नै परल । नाम स ऊ रूपवत्ति रहे त काम स सुपनेखा । वकरा मन मे कहियो नै सुभक आ सुन्दर बात आवै । ऊ जखनि तखनि सोचे कि सुनिल अइ दुनियाँ मे नइ रहितै त, यी पुरे राज हमरे होइतै, हम अइ देसके एक रानी बइन जइति आ हमर वर राजा ।

अइ के लेल कतियो वेर अपना वर के सिखलौक कि छोटका के बिच जंगल मे छोरदेवक । मुदा छोटका पुरा घर मे नै, बल्कि पुरा राज मे सबके पिर्य रहे । जखन मारबाक कोनो उपाय नै लागल तब भौजी रुपवत्ति एक टा उपाय सोचलक कि, दसैं मे त छोटका अइबे करतै वोही मे किछियो कर परतै । तइदुवारे दैस के यगाडिए स उपाय प उपाय सोच लागल ।

काम के सफल पारके लेल, एकटा डइनिया के भेटक जोगार लगैलक । आ राइत के दुपहरिया मे डइनिया स भेटल, आ यपन बात सुनैलक । डइनिया यी बात गौर स सुन्लक आ भौजी स जोगार बतैवते कहैय,

"हे मैलकाइन हम त यवल दुवल गरिव जनता छि, राजा साहेब जानत त हमरा देसे निकाला क देत, लेकिन आव तु कहै छा, त सुन तोहर काम सफल भ जतो, दसैं के यस्ठिमि के राइत, तु यपना देउर छोटका के कान मे करु तेल आ कुत्ता के कान मे रहबला अठौरी कान मे रइख दिइयो, तोहर काम पुरा भ जतो ।"

जेहने डइनिया कहने रहे ओहने अस्ठमी के राइत मे भौजी चौयवटिया प जाक, टुना मुना कइलक आ दरवार मे सुतल छोटका के कान मे करु तेल आ अठौरी राइख देलक । रखिते छोटका एकटा सुभयक कुत्ता बइन गेल । यी देखिते भौजी मन खुशी स विभोर भ गेल ।

एमहर राजा अपन छोटका के सबैतर खोजी करैय, मुदा कतौ न भेटला के बाद निराश भ क अपन राज काज मे लाइ गेल । मुदा छोटका यी सब बात जाइनियौक कुछ नइ कर सकैय । त रानी सेहो बहुत दुखी होय य । लेकिन नभका कुत्ता के राजदरबार मे देख क रानी अपन छोटका के बिसैर क कुत्ता मे भुला जाइय ।

घन्टा दिन मे, दिन महिनामे, महिना बरख मे बितैत चैल जाइ य, एक दिन कुत्ता रस्ता भुला क यइ राज स दोसर राज मे पुइग जाइ य । रास्ता मे बहुते किसिमके करिकवा कुत्ता त उजरा कुत्ता सब काइटक छत बिछत क दैय । मुदा यी सुभक कुत्ता घुइर फीर क, दोसर राज के राजदरबार मे पुइग गेल ।

अधमरु सन भेल कुत्ता के देख क राजदरबार के कर्मचारी सब कुत्ता के बचबैत, कुत्ता के खाइला दैय य । आ कुत्ता के देख ला, मेला लाइग जाइय । कुत्ता के देख ला, मन्त्री मात्रै नै राजा सेहो आइव जाइय । आदेस दैय कि अइ कुत्ता के राजदरबार मे राखल जाय । वहि अनुसार यी कुत्ता राजदरबार मे रहल लागल । राजदरबार मे सब वकरा वतने प्रम करे ।

मुदा एक राइत राजदरबार मे भारी संख्या मे चोर आइव क चोरि कर लागल, यी सब कुत्ता सेहो दखलक मुदा कुत्ता किछियो नै बोइल, चोर सब समान कत ल जाइय, वते मात्रे ध्यान देलक । विहान भेले राजा मन्त्री सब जागल त कोइ कुत्ता के मारमा छुटल, त कोइ गारिये मुहे छुटल, कि यी कुत्ता राइत मे नयी जगयलक ।

तब कुत्ता राजा ल गेल आ कुइ कुइ करिते, राजा के धोती पकइक अगाडि घिचैय । आ पैरवा दिसा ल जाइके कोसिस करैय, तब एकटा बुद्धिमान मन्त्री राजा के अगाडि बढ के सल्लाह दैय य । मन्त्री आ राजा अगाडि बढल त जंगल मे कुत्ता सब समान देखादेलक ।

ओइ दिन स कुत्ता के, सब गोटे आरो माया करय लागल । कुत्ता त राजदरबार के बडका चौकिदार बइन गेल ।

राजा के एकटा छोटकी बेटी सेहो रहे, ओकर नाम प्रेम कुमारी रहे । प्रेम कुमारी अपन नामे जिका प्रेमी रहे । ओकरा सब बस्तु मे ओतने माया रहे जते सुन्दर वस्तु । ऊ कोनो बस्तु आ जनावर मे कोनो किसिमके दोस नै देखे । तै दुवारे ऊ कुत्ता के ओतने माया करे जते कोइली आवाज के ।

ओकर माया दिन प दिन कुत्ता स बढैत चैल गेल । आ कुत्ता सेहो ओकरा स ओतने माया करे । ओकरा दुनु के माया देखक, नै बुझाइ कि एगो आदमी हय आ दोसर कोनो जनावर । दुनु के बिच मे एना बुझाइ, जेना नउह आ ओंरी के बिच के सम्बन्ध रहे ।

एक दिन कुत्ता प्रेम कुमारी बैठल ठाउँ मे आइब क बैठ गेल । त प्रेम कुमारी अपन हाथ कुत्ता के देहप सहलाव लागल । सहलैवते सहलैवते ओकर हाथ कुत्ता के कान तक पुइग गेल । त प्रेम कुमारी कुत्ता के कान मे तकलक, त कान मे एकटा बडका अठौरी देखलक । कुत्ता आरो अलसिया गेल, आ अठौरी के निकाल देलक ।

अठौरी निकालइते एकटा चमत्कार भ गेल । कुत्ता त एकटा सुभक जवान आदमी बैन गेल । राजदरबार मे त हाहाकार मइच गेल, आ मेला लाइग गेल । आव यी लभका आदमी अपन पुरा रामकहानी सुनइलक राजदरबार मे ।

राजा तब अपन राजदूत के सुनिलदत के राज मे पठौलक, आ अपन छोटकी बेटी आ छोटका के बिच मे विवाह करौलक । विवाह धुमधाम स पुरा भेल त, भौजी के देशस निकाला कदेलक ।

— समाप्त —
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