एकटा गाउँ मे एउटा बरका टोक रहे। ओइ बरका टोक मे एकटा बडका गाछी प कौवा आ एकटा फुदी रहैत रहे। ओइ दिनु के बिच मे बरका मितिन रहे।
एक दिन फुदि कहलक कौवा स, "हे मितिन, लोक सब के देखैत रहै छि भोज भतेर आ पाटी करैत, से अपनो सब कर्यैता। एक दिन तु हमरा अपन अन्डा खियवैता आ दोसर दिन हम तोरा अपन अन्डा खियवतियो।"
यि बात कौवा के बहुत मन परल। कौवा कहलक फुदि स, "हँ मितिन।"
फुदि कहलक कौवा स, "पहिने तोपन अन्डा हमरा खियाब आ विहान हम तोरा अपन अन्डा खियवो।"
कौवा बहुत खुशीके साथ मितिन फुदि के नौता देलक आ अपन अन्डा खियैलक।
विहान भेले कौवा फुदि के घरे आइल आ कहलक, "हे मितिन हम अइलिओ से अन्डा कोमहर छो, से खियाब न।"
यि बात सुनक फुदि कान खरा कैलक आ कौवा स कहैय, "हे मितिन बात त बड सुन्दर कहै छा, लेकिन तोहर लोल सबेरे सबेरे अलिले प परै हो, से तु गंगा जी स लोल धोक अइता, त तु पवित्रो भ जइता, तब अन्डा खइता।"
यि बात सुइन क कौवा गंगा जी गेल आ गंगा जी स कहैय —
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"
यि सुइनक गंगा मैया कौवा स कहैय, "हे कौवा भवानी, हमरा मे त पानी के बडका बडका लहरा चलै है, से तु त दहाइये जैबा, से तु कुम्हार लस चुकिला लाब, ओइ मे हम पानी ध देबो, तु अपन लोल धोय लिहा।"
तब कौवा भवानी कुम्हार ल गेल आ कुम्हार स कहैय —
चुकिला गंगा जी स पानी लाना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"
कुम्हार भैया यि सुइन क कौवा भवानी स कहैय, "हे कौवा भवानी, हमरा त खुरपी ये नै हो, से हम तोरा माटी कोइरक, चुकिला बनाक दितियो, से तु हरिन स सिंहिला लाब, ओइ लक माटि कोइरक चुकिला बनायक दितियो।"
तब कौवा भवानी हरिन ल गेल आ हरिन स कहैय —
चुकिला गंगा जी स पानी लाना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"
हरिन बहिन तब कौवा भवानी स कहैय, "हे कौवा भवानी, हम त सात दिन स भुखल छियो, से हमरा ला तु गाई के दुध आइन दा, दुध पि क हम बलुवार होवो आ तोरा सिंह तोइर क देवो।"
तब कौवा भवानी गाई ल गेल आ गाई स कहैय —
तोर सिंहला कोर मटिला गरह
चुकिला गंगा जी स पानी लाना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"
गाई तब कौवा भवानी स कहैय, "हे कौवा भवानी हम पाँच दिन स घास नै खैयने छि से तु हमरा ला घसबाहिनी स घास आइन दा, दब हम तोरा दुध देवो।"
तब कौवा भवानी उरैत उरैत घसबाहिनी ल गेल आ कहैय —
ले दुधिला तोर सिंहिला कोर मटिला गरह
चुकिला गंगा जी स पानी लाना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"
तब घसबाहिनी कौवा भवानी स कहैय, "हे कौवा भवानी हमरा त हसुवे नै हो, से तु लोहार ल स हसुवा लाइव दिता त हम घास काइट क दितियो।"
तब कौवा भवानी लोहार ल गेल आ कहैय —
काट घसिला दे दुधिला
तोर सिंहिला कोर मटिला गरह
चुकिला गंगा जी स पानी लाना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"
तब लोहार भैया दुटा हसुवा गरहलक आ एगो के भाथी मे धिपा क लाल क देलक, त दोसर के ओहिने छोइर देलक आ कौवा भवानी स कहैय, "हे कौवा भवानी कोन हसुवा लेबा से लला।"
कौवा भवानी यि दुनु हसुवा देख क असमंजस मे पइर गेल। कुछ देर तक सोचलक कि कारि हसुवा स जरूर लाल हसुवा निमन होतै।
तै दुवारे ललका हसुवा के लोल लक पकरलक। आ पकैरते राम राम क परान देज देलक।