फुदि रानी आ कौवा भवानी

डा. चन्देश्वर यादव

✦ Maithili Folk Tale

एकटा गाउँ मे एउटा बरका टोक रहे। ओइ बरका टोक मे एकटा बडका गाछी प कौवा आ एकटा फुदी रहैत रहे। ओइ दिनु के बिच मे बरका मितिन रहे।

एक दिन फुदि कहलक कौवा स, "हे मितिन, लोक सब के देखैत रहै छि भोज भतेर आ पाटी करैत, से अपनो सब कर्यैता। एक दिन तु हमरा अपन अन्डा खियवैता आ दोसर दिन हम तोरा अपन अन्डा खियवतियो।"

यि बात कौवा के बहुत मन परल। कौवा कहलक फुदि स, "हँ मितिन।"

फुदि कहलक कौवा स, "पहिने तोपन अन्डा हमरा खियाब आ विहान हम तोरा अपन अन्डा खियवो।"

कौवा बहुत खुशीके साथ मितिन फुदि के नौता देलक आ अपन अन्डा खियैलक।

विहान भेले कौवा फुदि के घरे आइल आ कहलक, "हे मितिन हम अइलिओ से अन्डा कोमहर छो, से खियाब न।"

यि बात सुनक फुदि कान खरा कैलक आ कौवा स कहैय, "हे मितिन बात त बड सुन्दर कहै छा, लेकिन तोहर लोल सबेरे सबेरे अलिले प परै हो, से तु गंगा जी स लोल धोक अइता, त तु पवित्रो भ जइता, तब अन्डा खइता।"

यि बात सुइन क कौवा गंगा जी गेल आ गंगा जी स कहैय —

"हे गंगा मैया, मैया पानी देना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"

यि सुइनक गंगा मैया कौवा स कहैय, "हे कौवा भवानी, हमरा मे त पानी के बडका बडका लहरा चलै है, से तु त दहाइये जैबा, से तु कुम्हार लस चुकिला लाब, ओइ मे हम पानी ध देबो, तु अपन लोल धोय लिहा।"

तब कौवा भवानी कुम्हार ल गेल आ कुम्हार स कहैय —

"हे कुम्हार भैया, भैया गर्ह चुकिला दे
चुकिला गंगा जी स पानी लाना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"

कुम्हार भैया यि सुइन क कौवा भवानी स कहैय, "हे कौवा भवानी, हमरा त खुरपी ये नै हो, से हम तोरा माटी कोइरक, चुकिला बनाक दितियो, से तु हरिन स सिंहिला लाब, ओइ लक माटि कोइरक चुकिला बनायक दितियो।"

तब कौवा भवानी हरिन ल गेल आ हरिन स कहैय —

"गे हरिन बहिन, तोर सिंहिला कोर मटिला गरह
चुकिला गंगा जी स पानी लाना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"

हरिन बहिन तब कौवा भवानी स कहैय, "हे कौवा भवानी, हम त सात दिन स भुखल छियो, से हमरा ला तु गाई के दुध आइन दा, दुध पि क हम बलुवार होवो आ तोरा सिंह तोइर क देवो।"

तब कौवा भवानी गाई ल गेल आ गाई स कहैय —

"हे गौया, दे दुधिला
तोर सिंहला कोर मटिला गरह
चुकिला गंगा जी स पानी लाना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"

गाई तब कौवा भवानी स कहैय, "हे कौवा भवानी हम पाँच दिन स घास नै खैयने छि से तु हमरा ला घसबाहिनी स घास आइन दा, दब हम तोरा दुध देवो।"

तब कौवा भवानी उरैत उरैत घसबाहिनी ल गेल आ कहैय —

"हे घसबाहिनी बहिन, दे घसिला
ले दुधिला तोर सिंहिला कोर मटिला गरह
चुकिला गंगा जी स पानी लाना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"

तब घसबाहिनी कौवा भवानी स कहैय, "हे कौवा भवानी हमरा त हसुवे नै हो, से तु लोहार ल स हसुवा लाइव दिता त हम घास काइट क दितियो।"

तब कौवा भवानी लोहार ल गेल आ कहैय —

"हे लोहार भैया, दे हसुला
काट घसिला दे दुधिला
तोर सिंहिला कोर मटिला गरह
चुकिला गंगा जी स पानी लाना
लोल धोना
तब खना फुदि रानी बच्चा।"

तब लोहार भैया दुटा हसुवा गरहलक आ एगो के भाथी मे धिपा क लाल क देलक, त दोसर के ओहिने छोइर देलक आ कौवा भवानी स कहैय, "हे कौवा भवानी कोन हसुवा लेबा से लला।"

कौवा भवानी यि दुनु हसुवा देख क असमंजस मे पइर गेल। कुछ देर तक सोचलक कि कारि हसुवा स जरूर लाल हसुवा निमन होतै।

तै दुवारे ललका हसुवा के लोल लक पकरलक। आ पकैरते राम राम क परान देज देलक।

— समाप्त —
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