मजुर आ मजुरनी / भाग्य

डा. चन्देश्वर यादव

✦ Maithili Story

एक खन्ड बन्ड मे एकटा बडका जंगल रहे। ओइ जंगल मे बहुते किसिमके जनावर आ चिरय चुनमुन सब सेहो रहैत रहे। ओइ मे एकटा मजुर सेहो रहैत रहे। ऊ मजुर बहुत गरिव रहे, मुदा बहुत इमान्दार आ मेहनती रहे। देखमे ऊ मजुर बहुत लटल वुटल रहे। ओकर इमान्दारिता आ मेहनत देख क भगवान ओकर जोरी एकटा सुन्दर आ धनिक बाप के बेटी मजुरनी स तय क देलक।

ओइ मजुरनी के ठोर येहन लाल रहे जेहन मुंगा। ओकरा ठोररंगा के कोनो जरूरी नै रहे। ओकर आइख येहन करीया, जेहन धोलफल के सझिया। ओकर डाँर येहन पातर, जेहन बाघक डाँर। यी सब देख क केकरो मन होइ कि देखते रहिती।

जेहने ऊ देख मे मनमोहक रहे, ओहिने ओकर मन बिसाल सपना स भरल रहे। ऊ दिनो मे सपना देखे कि ओकर बियाह जरूर कोनो राजकुमारे चाहे कोनो सेठ के बेटा स होतय।

एमहर मजुरनी के बाप बेटी के बडैत देख क सेहो बहुत चिन्तित रहे की बेटी के बियाह केना आ कत होइत। यि सब सोइच क ठैयाँ आ छता ल क वर खोज ला निकैल गेल। अइ जंगल ओइ जंगल घुमल, मुदा कोनो सुराक नै लागल। अन्त मे खन्ड बन्ड जंगल मे पुगल, ओइ एगो लडका के सुराक लागल आ ओइ लडका के घरे पुगल।

लडका के देखलक बहुत लटल वुटल, मुदा पत्ता लाइल कि यि लडका बहुत इमान्दार आ मेहनती अछि। तइ दुवारे लडका पसन्द क लेलक। आ वोतने नइ विवाहक दिन सेहो तय कदेलक।

विवाहक दिन वरियाती बहुत धुमधाम के साथ हाथी, घोडा सवार ढोल, पिपहि आ अंग्रेजी बाजा के साथ दुरा प पुइग गेल। यी सब देख टोल महला के लोक बहुत हर्षित भेल। धुमधाम के साथ स्वइमवर आ टोअंगर के धान कुटाइत विवाह पुरा भेल। कनिया आ वर दुनु वर क घर क लेल विदा भेल।

मुदा कनिया मुरी प हाथ धक बैठ गेल। कनिया यानेकी मजुरनी के सब सपना चकनाचुर भ गेल। मजुरनी बच्चे स सपना देखैत रहे की विवाह के बाद भोज, भतेज आ पाटी सब मे सहभागी होबौ आ रंग बहिरंग के गर गहना आ लता कपडा सब लगबै। मुदा ओकरा वर, आनेकी मजुर के, वते कमाइ नइ रहे की ओकर सपना पूरा होइत। तै दुवारे मजुरनी कहियो खुसी नै देख मे आइल।

यी देख क मजुर सेहो दुखी रहै छल। जखन काम स मजुर घर आवे त देखे मजुरनी के आइख मे लोरे। अइस मजुर बहुत दुखि रहे।

मुदा एक दिन मजुर, जंगल के राजा सिंह के राजदरबार स नौता पैलक पुरे परिवार भोज आ नाच गान मे सहभागी होइ के। यी भोज आ नाच गान मजुर आ मजुरनी के जीवन मे पहिल दिन रहे, खुसीयाली साटासाट कर के।

यी बात मजुर कहलक मजुरनी स। मजुरनी खुसी स बिजोर भ गेल कि जिवन के सपना पुरा भ जाइत यइ बेर। मुदा यहि बेर हेयत कि नै, से विहानविहाने लागल। नौता त राजदरबार स पइलक मुदा कोन ड्रेस लगाइब, कोन गहना पहिरव से पिरोलय लागल।

मजुर दिन भइर के काम कक सझिया मे आइल त फेरु देखैय आइख मे लोर। यी देखक मजुरनी स मजुर कहैय, "हे मजुरनी, हमर प्रिय, आव तु किया सिसन लोर झारैय छा, आव कि भेलो।"

तब मजुरनी कहैय मजुर स, "नौता मात्रे स नै होतै, नै हमरा ड्रेस हब, नै गर गहना, से हम केना भोज मे जाइब। हमरा पहिले ड्रेस किन दिय, तब हम भोज मे जाइब।"

यी बात सुइन क मजुर छक्क पैइर गेल कि आव हम कि करु। तब मजुर सनजोइग क रखने ५००० हजार रुपैयाँ मजुरनी के देलक आ कहलक कि यइ रूपैयाँ स ड्रेस आ गहना सब किन लिय। मुदा यी रूपैयाँ मजुरनी के लेल पर्याप्त नै भेल।

तब मजुरनी अपन एकटा धनिक वेस्ट मितिन के घर गेल आ संकोच स कहलक, "हे मितिन, हम राजदरबार के एकटा वडका भोजमे जाइ छि, मुदा हमरा गहना नै हब, से तोपन गहना एक राइत के लेल पैइचा दिता।"

यी बात सुइनक मजुरनी के मितिन अपन अनवारी खोइलक आ विभिन्न प्रकारके गर गहना सब देखाव लागल। तइ मे स सब स सुन्दर हिरा के मंगलसुत्र पसंद कइलक आ खुसी के साथ अपन घर आइल। आ सोचैय कि आव हमर सपना पुरा भेल।

मजुरनी दिन प दिन भोजक दिन गनैय कि पाटी कहिया आइत। पाटी के दिन सेहो आइल आ अपने आप के सोल्हो सिंगार आ बतिसो आवरन स सजायक पाटी मे पुगल। ओइ पाटी मे असगरे मजुरनी सबहक आइख के केन्द्र बइयन गेल आ राइत भइर खुब नाचल, गैलक आ आनंद लेलक। अइ बिच मे मजुर कत रहे मजुरनी के कोनो पता नै।

बिहान भेल आ दुनु परानी घर आइल। मुदा घर अबते मजुरनी अइना के अगाडि खरा भेल त मंगलसुत्र गरा मे नै देखते बिहोस होइते मजुरस कहैय, "हम बर्बाद भ गेलि, मंगलसुत्र हरा गेल।"

यी बात सुइन क मजुर थकमकाइते मंगलसुत्र के खोजी मे दुनु परानी चलल मुदा कहि कतैय नै भटल।

मंगलसुत्रक हरनाइ दुनु परानी के चइन छिन लेलक। मंगलसुत्र मितिन के देवक लेल घरमे जे जते गर गहना आ संम्पति रहे ओकरो बेच देलक, मुदा वहु स पुरा नै भेल। तब घर आ जमिन सेहो बेचैत भाडा के घरमे चइल गेल। ओतने नइ तइयो नइ पुगल त ऋण लक मितिन के मंगलसुत्र देलक।

येमहर आव दुनु परानी घर स बेघर भ गेल। आव ऋण सदाभबला जेहो काम नै करके सेहो काम कर लागल। दस वर्षके वाद जेना तेना ऋण सदयलक।

दसमा वर्ष मे एक दिन बजार मे तरकारी किनैत काल अपन ओहि मितिन के मजुरनी देखैय। मुदा मितिन नै चिनक भिखमंगिनि जिका व्यवहार करैय। तब मजुरनी मितिन स कहैय, "हम ओहे मितिन छियो जे मंगलसुत्र लगेल रहियो।"

तब मितिन कहैय मजुरनी स, "इ सब केना भेलो?"

तब मजुरनी मितिन स कहैय, "यी सब तोरे चलते भेल हे मितिन। तोरे हिरा के मंगलसुत्र सदभैत सदभैत यी हाल हमर भेलो।"

तब मितिन कहैय मजुरनी स, "यी सब किय्य कैला तु। उ मंगलसुत्र हिरा के पालिस चराइल रहो।"

✦ Moral of the Story

"तारगाछी प स खसल त खजुरगाछी प अटकल।"

— समाप्त —
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